Special Intensive Revision (SIR): मतदाता सूची पुनरीक्षण में 91% डिजिटाइजेशन पूरा.

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Special Intensive Revision (SIR): मतदाता सूची पुनरीक्षण में 91% डिजिटाइजेशन पूरा

November 28, 2025 By CG Naukri 24

1 दिसंबर 2025 — लेखक: अजय वर्मा

छत्तीसगढ़ में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) अभियान में अब तक मतदाता सूची का डिजिटाइजेशन 91% तक पूरा हो चुका है। अधिकारीयों के मुताबिक राज्य भर से लगभग 1 करोड़ 92 लाख से अधिक प्रपत्रों का डिजिटाइज़ेशन किया जा चुका है, जिससे चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सुगमता आने की उम्मीद बढ़ गयी है। यह अभियान मतदाता डेटाबेस को अद्यतन करने, डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने और नए मतदाताओं को सूचीबद्ध करने के लिए चलाया जा रहा है।

Special Intensive Revision (SIR): मतदाता सूची पुनरीक्षण में 91% डिजिटाइजेशन पूरा.

अभियान की प्रगति और महत्त्व

SIR के तहत किए जा रहे डिजिटलीकरण से मतदाता सूचियों का केंद्रीकृत और खोज-योग्य रिकॉर्ड बनता जा रहा है। इससे नामों, पते और पहचान से जुड़ी त्रुटियों का त्वरित पता लगाना व सुधारना संभव होगा। आयोग का कहना है कि डिजिटलीकरण के बाद मोबाइल और वेब पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपनी जानकारियाँ आसानी से सत्यापित कर सकेंगे — इससे मतदाता शिकायतों के निस्तारण में भी तेजी आएगी।

प्रक्रिया: किस तरह हो रहा कार्य

डीजी सीट के अभिन्य अधिकारीयों ने क्षेत्रीय टीमों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक मतदान केंद्र के स्तर पर फॉर्म और दस्तावेज़ों की स्कैनिंग और मानकीकृत टैगिंग करें। दस्तावेजों की फोटो-क्वालिटी जांच, OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) और मेटाडेटा एंट्री की जा रही है ताकि सामग्री डिजिटल डेटाबेस में सर्चेबल बने। साथ ही डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एन्क्रिप्शन व एक्सेस-कंट्रोल लागू किया जा रहा है।

नागरिकों के लिए क्या मायने रखता है?

डिजिटाइजेशन से मतदाता अपने नाम, पते या अन्य विवरण ऑनलाइन चेक कर सकेंगे। यदि कोई विसंगति मिलेगी तो उसे सुधारने या शिकायत दर्ज कराने का प्रोसेस तेज और सरल होगा। विशेष रूप से ग्रामीण व दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह सुविधा लाभप्रद साबित होगी, क्योंकि अब उन्हें फिजिकल फाइलों के पीछे भागने की आवश्यकता घटेगी।

आगे की योजनाएँ और चुनौतियाँ

हालाँकि 91% डिजिटाइजेशन बड़ी उपलब्धि है, पर शेष 9% कार्य को पूरा करने में कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं — जैसे दुर्गम इलाकों से दस्तावेज जुटाना, OCR त्रुटियाँ और सत्यापन में समय। चुनाव आयोग ने कहा है कि अंतिम चरण में क्वालिटी कंट्रोल समेत पुनः जाँच का विस्तृत चरण रखा गया है ताकि अंतिम डेटाबेस उच्च मानकों का हो। सभी जिलों में प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता बढ़ाकर बची हुई फाइलों को जल्दी पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

राज्य शासन और चुनाव आयोग का मानना है कि इस डिजिटलीकरण के बाद मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय होगी और आगामी चुनावों में मतदान प्रणाली की साख मजबूत होगी। नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे अपनी जानकारी का जरूर सत्यापन करें और किसी भी त्रुटि को समय रहते रिपोर्ट करें।


डिस्क्लेमर:

यह लेख उपलब्ध आधिकारिक और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर संकलित किया गया है। आंकड़े समय-सापेक्ष हो सकते हैं; नवीनतम और अधिकृत जानकारी के लिए राज्य निर्वाचन आयोग या संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचनाएँ देखें। इस सामग्री का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है और यह किसी भी प्रकार की कानूनी या आधिकारिक सलाह नहीं है।

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