December 18, 2025 By CG Naukri 24
दिनांक: 18 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में होने वाले दाखिले को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार के नए निर्देश के अनुसार अब RTE के तहत केवल कक्षा 1 में ही प्रवेश दिया जाएगा, जबकि नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी (किंडरगार्टन) कक्षाओं में RTE के अंतर्गत दाखिले की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले के बाद शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

| Official Website | https://rte.cg.nic.in/ |
सरकार के फैसले की मुख्य वजह
सरकार का कहना है कि RTE अधिनियम का मूल उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा को सुलभ बनाना है, न कि प्री-प्राइमरी शिक्षा को। नियमों के अनुसार 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने RTE दाखिले को कक्षा 1 तक सीमित करने का निर्णय लिया है, ताकि कानून का सही तरीके से पालन हो सके।
निजी स्कूल संगठनों की नाराजगी
इस फैसले के बाद निजी स्कूल संगठनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अब तक नर्सरी और किंडरगार्टन में RTE के तहत दाखिले होते रहे हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शुरुआती शिक्षा का लाभ मिलता था। स्कूल संगठनों का तर्क है कि इस फैसले से गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को नुकसान होगा और शिक्षा में असमानता बढ़ सकती है।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
सरकारी आदेश के बाद अभिभावकों में भी असमंजस और चिंता का माहौल है। कई माता-पिता का कहना है कि वे अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन निजी स्कूलों की फीस उनके लिए वहन करना मुश्किल है। RTE के तहत नर्सरी में दाखिला बंद होने से अब उन्हें या तो सरकारी स्कूलों पर निर्भर रहना होगा या फिर भारी फीस चुकानी पड़ेगी।
शिक्षा विभाग का पक्ष
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय नियमों के अनुरूप लिया गया है। विभाग के अनुसार, प्री-प्राइमरी शिक्षा के लिए अलग नीतियां और योजनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि छोटे बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। साथ ही विभाग ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 1 में RTE के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।
भविष्य में हो सकता है पुनर्विचार
जानकारों का मानना है कि यदि इस फैसले को लेकर विरोध और दबाव बढ़ता है, तो सरकार भविष्य में इस पर पुनर्विचार कर सकती है। फिलहाल यह आदेश लागू कर दिया गया है और आगामी शैक्षणिक सत्र में नर्सरी और किंडरगार्टन में RTE के तहत दाखिले नहीं होंगे। शिक्षा से जुड़े संगठन इस मुद्दे पर सरकार से बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।
शिक्षा नीति पर पड़ेगा असर
यह फैसला छत्तीसगढ़ की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसका असर सीधे तौर पर हजारों बच्चों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस निर्णय के बाद प्री-प्राइमरी शिक्षा को लेकर क्या वैकल्पिक व्यवस्था करती है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, सरकारी निर्देशों और प्रारंभिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। RTE से संबंधित नियमों और नीतियों में समय-समय पर बदलाव संभव है। किसी भी आधिकारिक जानकारी या अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना को ही प्रमाणिक माना जाए।








