February 08, 2026 By CG Naukri 24
दिनांक: 8 जनवरी 2026
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ में जमीन और संपत्ति खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। राज्य सरकार ने जमीन की नई गाइडलाइन दरों को मंजूरी दे दी है, जो 30 जनवरी 2026 से लागू होंगी। इस संशोधन का असर रायपुर, कोरबा सहित कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलेगा। नई दरों के लागू होने से रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और संपत्ति के बाजार मूल्य में बदलाव आना तय माना जा रहा है।
क्या होती है गाइडलाइन दर
गाइडलाइन दर वह न्यूनतम मूल्य होता है, जिस पर किसी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती है। सरकार हर साल या आवश्यकता के अनुसार इन दरों में संशोधन करती है, ताकि बाजार मूल्य और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर कम किया जा सके। यदि गाइडलाइन दरें कम होती हैं तो रजिस्ट्री सस्ती पड़ती है, वहीं दरें बढ़ने पर स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क भी बढ़ जाता है।
रायपुर और कोरबा में बड़ा असर
राजधानी रायपुर और औद्योगिक जिला कोरबा में जमीन की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी देखी गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां कई क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की गई है। रिहायशी कॉलोनियों, व्यावसायिक क्षेत्रों और मुख्य सड़कों से जुड़े इलाकों में संशोधन ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है। इससे रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में भी हुआ संशोधन
शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी गाइडलाइन दरों को अपडेट किया गया है। कृषि भूमि, आवासीय प्लॉट और छोटे कस्बों में स्थित जमीनों की दरों की समीक्षा कर नया मूल्य तय किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव स्थानीय बाजार दरों और जमीन के उपयोग को ध्यान में रखकर किया गया है।
खरीदार और विक्रेता पर क्या पड़ेगा असर
नई गाइडलाइन दरों के लागू होने से संपत्ति खरीदने वालों को अधिक स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां दरें बढ़ाई गई हैं। वहीं विक्रेताओं को यह लाभ हो सकता है कि संपत्ति का सरकारी मूल्य बाजार के करीब आ जाएगा। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दिनों में बाजार में थोड़ी सुस्ती आ सकती है, लेकिन लंबे समय में यह बदलाव संतुलन बनाएगा।
सरकार का उद्देश्य और आगे की तस्वीर
सरकार का कहना है कि गाइडलाइन दरों का संशोधन राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ जमीन के लेन-देन में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है। इससे काले धन पर रोक लगेगी और वास्तविक मूल्य पर रजिस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। 30 जनवरी से पहले लोग पुरानी दरों पर रजिस्ट्री कराने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे उप-पंजीयक कार्यालयों में भीड़ बढ़ने की संभावना है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य समाचार स्रोतों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। गाइडलाइन दरों, स्टांप ड्यूटी या रजिस्ट्री से संबंधित अंतिम और सटीक जानकारी के लिए संबंधित जिला पंजीयन कार्यालय या राज्य सरकार की आधिकारिक अधिसूचना अवश्य देखें।





