February 08, 2026 By CG Naukri 24
दिनांक: 8 जनवरी 2026
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ में कृषि और ग्रामीण रोजगार से जुड़ी योजनाओं को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में हाल में किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र और राज्य स्तर पर किए जा रहे संशोधनों से ग्रामीण गरीबों, किसानों और मजदूरों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। इसी को लेकर कांग्रेस अब व्यापक जनअभियान की तैयारी में जुट गई है।

मनरेगा में बदलाव पर बढ़ा विवाद
मनरेगा को ग्रामीण भारत की जीवनरेखा माना जाता है, जो हर साल करोड़ों लोगों को न्यूनतम रोजगार की गारंटी देता है। हाल के महीनों में योजना के बजट, काम के दिनों, भुगतान प्रक्रिया और पात्रता मानकों में किए गए बदलावों को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि इन बदलावों से काम के अवसर कम हो रहे हैं और मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है।
कांग्रेस की रणनीति और आंदोलन की तैयारी
कांग्रेस ने मनरेगा में किए गए संशोधनों के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है। पार्टी नेताओं के अनुसार, पहले गांव और ब्लॉक स्तर पर जनसभाएं और चौपाल लगाई जाएंगी, जहां मजदूरों और किसानों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके बाद जिला और राज्य स्तर पर प्रदर्शन, धरना और ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
ग्रामीण जनता को जोड़ने पर जोर
कांग्रेस का फोकस सीधे ग्रामीण जनता से संवाद स्थापित करने पर है। पार्टी का मानना है कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आधार है। खेतों की मेड़बंदी, तालाब निर्माण, सिंचाई और सड़क जैसे कार्यों से कृषि को भी सीधा लाभ मिलता है। ऐसे में यदि योजना कमजोर होती है, तो इसका असर खेती और गांवों की आजीविका पर पड़ेगा।
सरकार का पक्ष और जवाब
सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि मनरेगा में किए गए बदलाव पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए हैं। डिजिटल भुगतान, आधार आधारित सत्यापन और काम की निगरानी से फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सही लाभार्थियों तक योजना का फायदा पहुंचेगा। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों के कारण वास्तविक मजदूर ही सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं।
आने वाले समय में बढ़ सकता है सियासी टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनावी माहौल नजदीक आएगा, मनरेगा जैसे मुद्दे राजनीति के केंद्र में आ सकते हैं। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इस योजना का सीधा असर मतदाताओं पर पड़ता है। ऐसे में कांग्रेस का यह अभियान सरकार के लिए चुनौती बन सकता है और आने वाले दिनों में कृषि और रोजगार को लेकर राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य समाचार स्रोतों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप को दर्शाते हैं। किसी भी योजना या सरकारी निर्णय से संबंधित अंतिम और आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित विभाग या सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।





