December 21, 2025 By CG Naukri 24
दिनांक: 21 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रक्रिया में लगभग 27 लाख मतदाताओं के नामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और दोनों दल एक-दूसरे पर लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगा रहे हैं।

SIR प्रक्रिया क्या है
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना होता है। इसके तहत मृत मतदाताओं, स्थानांतरित हो चुके नागरिकों और दोहराए गए नामों को हटाया जाता है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार की जाती है, ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।
27 लाख नामों को लेकर उठा विवाद
SIR के दौरान लगभग 27 लाख मतदाताओं के नामों की समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद विवाद गहरा गया। कांग्रेस का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में नामों की जांच से कई वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे आगामी चुनावों में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि SIR की आड़ में चुनिंदा क्षेत्रों के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि जिन इलाकों में कांग्रेस का जनाधार मजबूत है, वहां मतदाता सूची में अधिक हस्तक्षेप किया जा रहा है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया को रोकने और पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
बीजेपी का पलटवार
वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। पार्टी का कहना है कि SIR एक नियमित और आवश्यक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल फर्जी और अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाना है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस बिना तथ्यों के डर फैलाकर जनता को गुमराह कर रही है।
चुनाव आयोग की सफाई
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित सत्यापन के नहीं हटाया जाएगा। आयोग के अनुसार जिन नामों पर आपत्ति या संदेह है, उनके लिए दावा-आपत्ति का पूरा अवसर दिया जाएगा। आयोग ने राजनीतिक दलों से संयम बरतने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति को और गरमा दिया है। आने वाले चुनावों को देखते हुए यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची से जुड़ा कोई भी मुद्दा सीधे लोकतंत्र से जुड़ा होता है, इसलिए इस पर सभी पक्षों को जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने की जरूरत है।
कुल मिलाकर SIR मतदाता समीक्षा विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक अहम मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग और राजनीतिक दल इस मसले को कैसे सुलझाते हैं और मतदाताओं का भरोसा कैसे बनाए रखते हैं।
डिस्क्लेमर:
यह लेख सामान्य सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों, राजनीतिक बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। किसी भी आधिकारिक निर्णय या अंतिम आंकड़ों के लिए चुनाव आयोग एवं संबंधित प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणाओं को ही प्रमाणिक माना जाए।








