November 22, 2025 By CG Naukri 24
22 November 2025 — लेखन: Ajay Verma
भारत में लागू हुए नए श्रम कोडों को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान केंद्रीय श्रम मंत्री द्वारा दिया गया है। मंत्री ने पुष्टि की है कि नए श्रम सुधार देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेंगे और उद्योग जगत में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देंगे। सरकार का दावा है कि ये सुधार देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले साबित होंगे, खासकर ऐसे समय में जब भारत विश्व अर्थव्यवस्था में तेजी से उभरता हुआ खिलाड़ी बन रहा है।

श्रम मंत्री ने पुष्टि की
सरकार का उद्देश्य और सुधारों की पृष्ठभूमि
भारत में दशकों से श्रम कानूनों में परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। पुराने 29 कानून कई मामलों में जटिल, परस्पर-विरोधी और समय के अनुरूप नहीं रह गए थे। नए चार श्रम कोड—वेतन कोड, श्रम संबंध कोड, सामाजिक सुरक्षा कोड और व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य कोड—का उद्देश्य इन सभी नियमों को सरल, आधुनिक और प्रभावी बनाना है। श्रम मंत्री ने कहा कि इन सुधारों से श्रमिकों को संगठित क्षेत्र जैसी सुविधाएं मिलेंगी, चाहे वे गिग वर्कर हों, प्लेटफार्म वर्कर हों या अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मचारी।
40 करोड़ से अधिक श्रमिक होंगे लाभान्वित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नए कोडों के लागू होने से सीधे तौर पर 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों को लाभ मिलेगा। इनमें असंगठित क्षेत्र, फ्रीलांसर, डिलीवरी पार्टनर, ठेका कर्मचारी और कई अन्य श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं। सामाजिक सुरक्षा कोड के तहत अब पीएफ, ईएसआई, गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा निधि, मातृत्व लाभ, अपंगता सहायता और पेंशन जैसे सुविधाओं का विस्तार किया गया है। यह भारत में हेल्थ-सेफ्टी और ओल्ड-एज सिक्योरिटी सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
उद्योगों और नियोक्ताओं पर प्रभाव
श्रम मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नए नियम केवल श्रमिकों के लिए ही नहीं, बल्कि उद्योगों के लिए भी लाभकारी होंगे। सरलीकृत नियमों से व्यापार करना आसान होगा और अनुपालन में समय व संसाधनों की बचत होगी। डिजिटल रजिस्टर, ऑनलाइन अनुमतियाँ और यूनिफाइड फॉर्म जैसे प्रावधान उद्योगों को अधिक कुशल बनाते हैं। हालांकि कुछ उद्योगों ने इन परिवर्तनों को लागू करने की लागत पर चिंता जताई है, लेकिन सरकार का मानना है कि लंबे समय में यह लागत वृद्धि उत्पादन और श्रमिक संतुष्टि के रूप में वापस मिल जाएगी।
भविष्य की संभावनाएँ और चुनौतियाँ
नए कोडों को लेकर देशभर के विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार भारत के श्रम बाजार को अधिक संगठित, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे। हालांकि वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्यों में इनका क्रियान्वयन कैसे होता है। कई राज्यों को अभी भी अपने नियम और अधिसूचनाएँ तैयार करनी हैं। दूसरी ओर, श्रमिक संगठनों द्वारा कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग भी की जा रही है। इन सबके बावजूद, श्रम मंत्री का दावा है कि यह सुधार भारत को वैश्विक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में तेजी लाएंगे।
Disclaimer:यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है और इसे किसी कानूनी, सरकारी या व्यावसायिक सलाह के रूप में न लिया जाए। विस्तृत और अद्यतन जानकारी के लिए संबंधित मंत्रालय और आधिकारिक वेबसाइटों को अवश्य देखें।
नोट: श्रम सुधार और कोड समय-समय पर संशोधित हो सकते हैं। ताज़ा जानकारी के लिए श्रम मंत्रालय की आधिकारिक सूचनाएँ देखें।









