November 7, 2025 By CG Naukri 24
प्रकाशित: 7 नवंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार
छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। नवीनतम सरकारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में अब औसतन प्रति 20 छात्रों पर एक अध्यापक उपलब्ध है। पहले यह अनुपात 26 से 28 छात्रों पर एक अध्यापक था। यह सुधार ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक भी धीरे-धीरे पहुँच रहा है।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा सुधार: अध्यापक-छात्र अनुपात में बड़ा सुधार दर्ज.
सरकार की योजनाओं का असर
राज्य सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा विभाग में कई नई नीतियाँ लागू की गई हैं। इनमें शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करना, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, और स्कूल बुनियादी ढांचे में सुधार जैसे कदम शामिल हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ‘शिक्षा गुणवत्ता मिशन’ और ‘हर स्कूल में शिक्षक’ जैसी योजनाओं से यह सुधार संभव हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव
पहले ग्रामीण इलाकों में कई स्कूल ऐसे थे जहाँ एक ही शिक्षक पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी निभा रहा था। अब सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर इन स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की है। बस्तर, कोरिया और सरगुजा जैसे जिलों में नए पद सृजित किए गए हैं, जिससे अध्यापन कार्य में सुधार और छात्रों की उपस्थिति में वृद्धि हुई है।
शिक्षकों की गुणवत्ता पर भी ध्यान
सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि शिक्षकों की गुणवत्ता पर भी अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ‘नवीन शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम’ के तहत 10,000 से अधिक शिक्षकों को डिजिटल और समावेशी शिक्षा के लिए प्रशिक्षित किया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब शिक्षक प्रेरित और सक्षम होंगे, तभी छात्र बेहतर परिणाम दे पाएँगे।
अभी भी कुछ चुनौतियाँ बाकी
हालाँकि राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी लगभग 6,000 स्कूल अभी भी ऐसे हैं जहाँ एक ही शिक्षक कार्यरत है। शिक्षा विभाग ने घोषणा की है कि अगले शैक्षणिक सत्र तक इन सभी स्कूलों में भी दो या अधिक शिक्षक नियुक्त किए जाएँगे। इसके अलावा, दुर्गम इलाकों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
जनता और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने इस सुधार का स्वागत किया है। उनका कहना है कि शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार से बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान और बेहतर शिक्षण वातावरण मिलेगा। राज्य में शिक्षा स्तर को राष्ट्रीय औसत तक पहुँचाने के लिए यह एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
डिसकलेमर
यह समाचार छत्तीसगढ़ सरकार और शिक्षा विभाग की रिपोर्टों एवं विश्वसनीय प्रशासनिक स्रोतों पर आधारित है। आँकड़ों में भविष्य में अद्यतन या बदलाव संभव हैं। पाठकों से अनुरोध है कि वे शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिसूचनाओं पर आधारित जानकारी पर भरोसा करें। लेखक/प्रकाशक किसी भी संभावित त्रुटि या संशोधन के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।




