छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का पर्यावरण संरक्षण पर बड़ा फैसला: कोरबा समेत खनन क्षेत्रों में ‘फ्लाई ऐश’ उड़ने पर रोक.

By CG Naukri 24

Published On:

Follow Us
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का पर्यावरण संरक्षण पर बड़ा फैसला: कोरबा समेत खनन क्षेत्रों में 'फ्लाई ऐश' उड़ने पर रोक

November 7, 2025 By CG Naukri 24

प्रकाशित: 7 नवंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा

फैसले की पृष्ठभूमि

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कोरबा, रायगढ़ और बलको जैसे औद्योगिक व खनन क्षेत्रों में “उड्डाण राख” (fly ash) के खुले में उड़ने और फैलने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। न्यायालय ने यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया, जिनमें स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने उद्योगों से निकलने वाली राख के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की थी।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का पर्यावरण संरक्षण पर बड़ा फैसला: कोरबा समेत खनन क्षेत्रों में ‘फ्लाई ऐश’ उड़ने पर रोक.

न्यायालय के निर्देश

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और कोरबा प्रशासन को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि उद्योगों को राख निस्तारण और भंडारण के लिए वैज्ञानिक उपाय अपनाने होंगे, ताकि वातावरण और भू-जल दोनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर जिम्मेदार कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।

स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया

कोरबा क्षेत्र के निवासियों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है। कई सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह निर्णय लंबे संघर्ष का परिणाम है। वर्षों से लोग राख की धूल से होने वाली सांस की बीमारियों और खेती पर इसके दुष्प्रभावों का सामना कर रहे थे। अब उम्मीद की जा रही है कि इस फैसले से वायु गुणवत्ता में सुधार आएगा और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को राहत मिलेगी।

सरकार और उद्योगों की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने अदालत के आदेश का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है। पर्यावरण विभाग ने कहा है कि सभी औद्योगिक इकाइयों को नोटिस जारी किए जाएंगे और अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी। वहीं कुछ उद्योगों ने कहा है कि वे आधुनिक फ्लाई ऐश प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर पहले से काम कर रहे हैं। सरकार ने यह भी कहा कि यह फैसला विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करेगा।

पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में पर्यावरणीय नीतियों को एक नया आयाम मिलेगा। कोरबा क्षेत्र भारत के प्रमुख थर्मल पावर केंद्रों में से एक है और यहाँ प्रतिवर्ष लाखों टन राख उत्पन्न होती है। यदि इस राख का समुचित निपटान और उपयोग किया जाए, तो इसे सीमेंट, ईंट निर्माण और सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पर्यावरणीय हानि को न्यूनतम किया जा सकेगा।

डिसकलेमर

यह लेख उच्च न्यायालय के आदेशों और विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। अदालत की प्रक्रिया और कार्यवाही में भविष्य में परिवर्तन संभव है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक न्यायालय आदेशों या सरकारी अधिसूचनाओं से नवीनतम जानकारी प्राप्त करें। लेखक/प्रकाशक किसी भी प्रकार की त्रुटि या अपडेट में देरी के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

You Might Also Like

Leave a Comment